गेहूं की कीमतों में वृद्धि: सरकारी कदमों का बाजार पर प्रभाव

सरकार के हालिया निर्णय के तहत खुले बाजार में गेहूं की बिक्री रोकने से गेहूं बाजार में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। बड़ी कंपनियों ने अपनी रणनीतियों को समायोजित किया है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी बिक्री में वृद्धि हुई है। इसके अलावा, आटा की बढ़ती स्थानीय और लेन-देन की मांग ने रोलर फ्लोर मिल्स के बीच गेहूं की खरीद को लेकर प्रतिस्पर्धा को और तीव्र कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप गेहूं की कीमतों में पिछले सप्ताह ₹80-90 प्रति क्विंटल की तेज़ वृद्धि देखी गई है, और जनवरी में ₹50-60 की और वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। सरकारी OMSS निलंबन का प्रभाव: सरकार द्वारा खुले बाजार बिक्री योजना (OMSS) के तहत गेहूं की बिक्री निलंबित करने का निर्णय पहले ही बाजार की कीमतों पर प्रभाव डालने की संभावना जताई गई थी, और अब यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पिछले सप्ताह की हमारी प्रक्षेपणों में कीमतों में वृद्धि की संभावना पहले से जताई गई थी, जो अब सच साबित हो रही है। वर्तमान में बड़ी कंपनियाँ अधिकांश गेहूं का स्टॉक अपने पास रखे हुए हैं, और मई से 10 दिसंबर तक बाजार गतिविधियों में धीमापन के कारण मंडियों में गेहूं की आपूर्ति घट गई है। इसके अलावा, कई बड़ी कंपनियाँ अपने स्टॉक्स को बेचने से बच रही हैं, जिसके कारण रोलर फ्लोर मिल्स से गेहूं की मांग बढ़ गई है। इस मांग में बदलाव ने गेहूं की कीमतों को बढ़ावा दिया है। निम्न गुणवत्ता वाले गेहूं की कीमत, जो पहले इस महीने ₹2,750 प्रति क्विंटल थी, अब बढ़कर ₹2,860 प्रति क्विंटल हो गई है। इसी तरह, उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं की कीमत ₹2,780 से बढ़कर ₹2,880-2,890 प्रति क्विंटल हो गई है। मूल्य प्रक्षेपण: हालांकि हालिया कीमतों में वृद्धि हुई है, गेहूं अब भी पिछले साल की तुलना में ₹250 प्रति क्विंटल सस्ता है। हालांकि, रोलर फ्लोर मिल्स से बढ़ी हुई मांग और सरकारी OMSS के तहत बिक्री के निलंबन के कारण, उम्मीद की जा रही है कि जनवरी 2024 में गेहूं की कीमत ₹50-60 प्रति क्विंटल और बढ़ सकती है। यदि बड़ी कंपनियाँ गेहूं को रोकने और उसकी बिक्री में देरी करती हैं, तो बाजार की कीमत ₹3,000 प्रति क्विंटल तक पहुँच सकती है। इसलिए, गेहूं की कीमतों की भविष्यवाणी मुख्य रूप से इन बड़ी कंपनियों के कदमों और खुले बाजार में सरकारी गेहूं की बिक्री फिर से शुरू होने की संभावना पर निर्भर करेगी। आटा और सूजी बाजार में रुझान: आटा और सूजी (सुझी) का व्यापार महत्वपूर्ण रूप से घट गया है, क्योंकि अतिरिक्त खपत में गिरावट आई है। इसके कारण इन तीन उत्पादों - गेहूं, आटा और सूजी - की कीमतें लगभग समान स्तर पर पहुंच गई हैं। आटे के मामले में, स्थानीय और लेन-देन की मांग के कारण 50 किलोग्राम के बैग की कीमत में ₹20-30 की वृद्धि हुई है। हालांकि, सूजी और आटे की कीमतें इस महीने ₹20-50 प्रति 50 किलोग्राम बैग के बीच घट गई हैं। गेहूं स्टॉक और भविष्य की दृष्टि: वर्तमान में, सरकार और गैर-सरकारी गोदामों में गेहूं का पर्याप्त स्टॉक जमा है। आगामी मौसम में गेहूं की खेती के लिए अनुकूल मौसम स्थितियाँ होने के कारण लगभग 1,170 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होने की उम्मीद है। इसलिए, सरकार को अपने मौजूदा स्टॉक को नए फसल के आने से पहले बेचने की चुनौती का सामना करना होगा। यदि ऐसा समय पर नहीं किया गया, तो अतिरिक्त भंडारण सुविधाओं की आवश्यकता पड़ेगी ताकि अधिक गेहूं को समायोजित किया जा सके।

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