स्पिनिंग मिलों की बढ़ती मांग से कपास में तेजी, CCI की कीमत बढ़ोतरी से बाजार को सहारा
स्पिनिंग मिलों की बढ़ती खरीदारी के चलते मंगलवार शाम गुजरात और उत्तर भारत के राज्यों में कपास की कीमतों में तेजी देखने को मिली। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने भी पिछले एक महीने में अपने बिक्री दाम ₹3,200 प्रति कैंडी तक बढ़ा दिए हैं, जिससे बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिली है। गुजरात के अहमदाबाद में शंकर-6 किस्म के कपास के भाव ₹250 बढ़कर ₹57,800 से ₹58,200 प्रति कैंडी (356 किलो) हो गए। पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी भाव ₹5,700 से ₹5,910 प्रति मन तक पहुंच गए, जबकि हरियाणा में यह ₹5,620 से ₹5,750 प्रति मन रहे। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव ₹5,600 से ₹5,970 प्रति मन तक मजबूत हुए, वहीं निचले राजस्थान में कपास ₹54,500 से ₹55,500 प्रति कैंडी के स्तर पर बोला गया। देशभर की मंडियों में कपास की कुल आवक 36,750 गांठ रही, जिसमें एक गांठ का वजन 170 किलो है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी आईसीई एक्सचेंज पर इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के दौरान कपास की कीमतों में मजबूती देखी गई। सोमवार को सीसीआई ने 2,88,700 गांठ कपास की बिक्री की, जिसमें स्पिनिंग मिलों ने 1,13,700 गांठ और व्यापारियों ने 1,75,000 गांठ खरीदी। इस दौरान सीसीआई ने अपने बिक्री दाम ₹1,300 प्रति कैंडी तक बढ़ाए। मार्च की शुरुआत से अब तक 2025-26 सीजन के लिए सीसीआई कपास के दाम ₹3,200 प्रति कैंडी तक बढ़ा चुकी है। वैश्विक स्तर पर भी कपास की कीमतों में मजबूती आई है और आईसीई वायदा बाजार में मार्च के पहले सप्ताह से अब तक करीब 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उत्पादक राज्यों में हाल के दिनों में कपास के दाम मजबूत हुए हैं। बाजार अनुमान के अनुसार, चालू सीजन में अब तक 280 लाख गांठ से अधिक कपास की आवक हो चुकी है, जबकि केवल 38-40 लाख गांठ की आवक अभी बाकी है। रायचूर, अदोनी और महाराष्ट्र व गुजरात के कुछ हिस्सों में कपास के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,110 प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच चुके हैं। बाजार में तेजी का मुख्य कारण स्पिनिंग मिलों की बढ़ती मांग को माना जा रहा है। व्यापारियों के अनुसार, वैश्विक बाजार में कीमतों में आई मजबूती का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। साथ ही, देश की अधिकांश स्पिनिंग मिलों के पास कपास का स्टॉक सीमित है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से यार्न के निर्यात की मांग में भी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, सीसीआई लगातार घरेलू बाजार में कपास की आपूर्ति कर रही है और उसके पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद, निगम हर सप्ताह अपने बिक्री दाम बढ़ा रहा है। ऐसे में घरेलू बाजार में कपास की कीमतों की दिशा काफी हद तक सीसीआई की मूल्य नीति पर निर्भर करेगी। चालू सीजन में उत्पादन अधिक रहने और आयात बढ़ने की संभावना के बावजूद, मौजूदा कीमतों पर जिनर्स की बिकवाली सीमित बनी हुई है, जो बाजार को सहारा दे रही है।