कमजोर मांग के बीच अरहर में गिरावट जारी, लेकिन मजबूत सपोर्ट से संभलने के संकेत

अरहर के बाजार में पिछले दो हफ्तों से जारी गिरावट सोमवार को भी देखने को मिली, जहां घरेलू बाजारों में करीब ₹50 की कमी दर्ज की गई। हालांकि बाजार पर दबाव बना हुआ है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर कुछ सपोर्ट भी नजर आ रहा है, इसलिए इसे पूरी तरह कमजोर कहना ठीक नहीं होगा। घरेलू स्तर पर दाल मिलों की मांग फिलहाल कमजोर है, जिससे कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी का रुख है—चेन्नई में लेमन अरहर के आयातित भाव अप्रैल-मई शिपमेंट के लिए करीब $840 प्रति टन (सीएनएफ) तक $10 गिर गए हैं, जबकि पुराने सीजन (2025) के सौदे लगभग $830 प्रति टन पर स्थिर हैं। घरेलू मंडियों की बात करें तो शाम के समय चेन्नई और मुंबई में लेमन अरहर ₹50 गिरकर ₹7625 पर आ गई, जबकि दिल्ली में भाव ₹7825 पर स्थिर रहे। देसी अरहर में इंदौर, सोलापुर, अकोला और कानपुर में हल्की गिरावट देखी गई, जबकि अन्य स्थानों पर कीमतें स्थिर रहीं। आयातित अरहर में भी कमजोरी रही—सूडान की अरहर ₹50 गिरकर ₹6850, गजरी अरहर ₹6400 और सफेद अरहर ₹6450 पर पहुंच गई। आयातित माल सस्ता होने से देसी और आयातित कीमतों के बीच का अंतर घटा है, जिससे घरेलू कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। फिलहाल मंडियों में भाव MSP से करीब 5-6% नीचे चल रहे हैं। सरकार द्वारा MSP पर खरीद जारी है, लेकिन मात्रा सीमित है और अब तक लगभग 2 लाख टन की ही खरीद हो पाई है। सप्लाई के मोर्चे पर, सरकारी केंद्रीय पूल में अरहर का स्टॉक करीब 5.5 लाख टन है, जिसे बहुत अधिक नहीं माना जा रहा है। साथ ही, कई क्षेत्रों में स्टॉक भी ज्यादा भारी नहीं है। भविष्य के संकेतों पर नजर डालें तो पिछले सप्ताह चेन्नई से बिकवाली के कारण करीब ₹300 प्रति क्विंटल की गिरावट आई थी और लेमन अरहर ₹7750 तक पहुंच गई थी। हालांकि निचले स्तरों पर बिकवाली अब कमजोर पड़ती दिख रही है। ट्रेडर्स के अनुसार, रंगून से हाजिर सौदों का पड़ता अभी भी ₹8000 से ऊपर है, जिससे कम भाव पर बेचने वालों की संख्या घट रही है। इसके अलावा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस बार उत्पादन कम रहने की खबर है, और कर्नाटक में नई आवक का दबाव भी लगभग खत्म हो चुका है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखें तो फिलहाल बाजार में कमजोरी जरूर है, लेकिन निचले स्तरों पर मजबूत सपोर्ट बनता दिख रहा है। आने वाले समय में अरहर के भाव “कुछ समय ठहरकर फिर संभलने” की दिशा में जा सकते हैं।

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