मजबूत मांग, एथेनॉल खपत और निर्यात समर्थन से मक्का बाजार में तेजी की मजबूत नींव
मक्का (कॉर्न) बाजार में मजबूत तेजी की नींव बनती हुई दिखाई दे रही है, जिसे कई मौलिक कारक समर्थन दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर एथेनॉल उद्योग की बढ़ती मांग, निर्यात गतिविधियों में मजबूती और पशु आहार (फीड) क्षेत्र से लगातार खरीदारी मिलकर कीमतों को मजबूत सहारा प्रदान कर रही हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ष 2025 के दौरान एथेनॉल उत्पादन रिकॉर्ड 16.4 अरब गैलन तक पहुंच गया, जबकि इसी अवधि में एथेनॉल निर्यात 2.2 अरब गैलन रहा। इससे मक्का की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कुल मांग को मजबूती मिली है। भारत में नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच लगभग 6.15 अरब लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई, जिसमें करीब 66% उत्पादन मक्का, चावल और अन्य अनाजों से किया गया। इससे देश में मक्का की घरेलू मांग को और बल मिला है। घरेलू खरीदारी के मोर्चे पर भी कई केंद्रों पर सक्रिय मांग देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र में बारामती एग्रो सेंटर, सांगली, कृष्णा कुंभ, सुपा और प्रीमियम चिक मुंबई द्वारा मक्का की खरीद ₹2,360 से ₹2,450 प्रति क्विंटल के दायरे में की जा रही है। बिहार में गुलाबबाग, पूर्णिया मंडी में प्रीमियम गुणवत्ता वाले मक्का के भाव ₹2,120-₹2,160 प्रति क्विंटल बताए जा रहे हैं, जबकि मध्यम गुणवत्ता का मक्का ₹2,000-₹2,100 प्रति क्विंटल के बीच कारोबार कर रहा है। वहीं, मानसी रैक प्वाइंट और बादलघाट रैक प्वाइंट पर भी कीमतें लगभग ₹2,000 प्रति क्विंटल के आसपास बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर, अमेरिका ने हाल ही में मेक्सिको को लगभग 2.85 लाख टन मक्का की नई बिक्री की है। साथ ही जापान, चीन और मेक्सिको से मांग लगातार बनी हुई है। हालांकि यूक्रेन में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है और आपूर्ति की स्थिति में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, फिर भी यूरोप के फीड उद्योग की स्थिर मांग वैश्विक बाजार को संतुलन प्रदान कर रही है। कुल मिलाकर, मजबूत उत्पादन और पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद बाजार में किसी बड़े नकारात्मक कारक की अनुपस्थिति मक्का बाजार की मजबूत बुनियादी स्थिति को दर्शाती है। जागृति एग्रो एसएमएस सर्विस के अनुसार, अल्पकाल में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन जब तक एथेनॉल और फीड क्षेत्र की मांग सक्रिय बनी रहती है, तब तक बाजार में तेजी का रुख कायम रहने की संभावना है। किसानों और व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे कीमतों में गिरावट के दौरान घबराकर बिक्री न करें और बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखें।