रिकॉर्ड सरकारी भंडार के बावजूद गेहूं के भाव मजबूत, मानसून पर टिकी बाजार की नजर
देश के गेहूं बाजार में इस समय सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि सरकारी भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद कीमतों में मजबूती क्यों बनी हुई है और आने वाले महीनों में बाजार का रुख क्या रह सकता है। 1 जून 2026 तक केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक बढ़कर 53.41 मिलियन टन हो गया है, जो पिछले पांच वर्षों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। यह मात्रा निर्धारित बफर स्टॉक मानक से लगभग दोगुनी है। चालू खरीद सीजन में सरकार ने करीब 35 मिलियन टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद दर्ज की है, जिससे सार्वजनिक भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद बाजार में कीमतों में नरमी देखने को नहीं मिली है। बीते एक सप्ताह के दौरान कई प्रमुख मंडियों में गेहूं के दाम ₹40 से ₹50 प्रति क्विंटल तक मजबूत हुए हैं। उत्तर प्रदेश की मंडियों में गेहूं ₹2380 से ₹2490 प्रति क्विंटल, राजस्थान में ₹2380 से ₹2768 प्रति क्विंटल तथा मध्य प्रदेश में ₹2400 से ₹2620 प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। वहीं दिल्ली की लॉरेंस रोड मंडी में मिल क्वालिटी गेहूं का भाव ₹2685 प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर उत्पादन और बढ़ी हुई आवक के बावजूद निजी क्षेत्र की सक्रिय खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है। खासकर बड़ी आटा मिलों और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों द्वारा लगातार खरीद किए जाने से कीमतों पर समर्थन बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गेहूं बाजार में मजबूती का माहौल है। अमेरिका के निर्यात अनुमान में कमी, फ्रांस में घटते भंडार और अल्जीरिया की बड़ी खरीदारी ने वैश्विक कीमतों को समर्थन प्रदान किया है। जागृति एग्रो एसएमएस सर्विस के मुताबिक आने वाले समय में गेहूं बाजार की चाल काफी हद तक मानसून की स्थिति और अल-नीनो के प्रभाव पर निर्भर करेगी। यदि मानसून सामान्य रहता है तो कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना सीमित रह सकती है और भारी सरकारी भंडार बाजार पर दबाव बना सकता है। दूसरी ओर, यदि मानसून कमजोर रहता है या मौसम संबंधी जोखिम बढ़ते हैं तो आगामी फसल को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिससे गेहूं की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।