आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में लालमिर्च के दामों ने बाजार में लगाई आग

कोल्ड स्टोरेज से सीमित मात्रा में माल निकलने के कारण इस प्रमुख मसाला जिंस की थोक कीमतों में पिछले केवल तीन दिनों में ही ₹5,000-6,000 प्रति क्विंटल की जोरदार तेजी दर्ज की गई है। इतनी कम अवधि में इतनी तेज उछाल पहले कभी नहीं देखा गया। स्थानीय थोक किराना बाजार में स्टॉकिस्टों की हर भाव पर जबरदस्त लिवाली के चलते 334 और 341 किस्म की लालमिर्च के भाव ₹4,000-5,000 प्रति क्विंटल बढ़कर क्रमशः ₹20,000-22,500 और ₹21,000-23,000 प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार इन किस्मों में हाल ही में पहले ही लगभग ₹1,000 प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी थी। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की प्रमुख उत्पादक मंडियों से आ रही तेजी की खबरों ने स्थानीय बाजार की धारणा को और मजबूत किया है। गुंटूर मंडी के व्यापारी जुगराज भंडारी ने बताया कि नई फसल की आवक बढ़कर करीब 50,000 बोरियों तक पहुंच गई है, जबकि पुरानी फसल की भी लगभग 20,000 बोरियां बाजार में आ रही हैं। इसके बावजूद विभिन्न किस्मों की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई हैं। उन्होंने बताया कि स्टॉकिस्टों की आक्रामक लिवाली के चलते तेजा लालमिर्च ₹3,500 उछलकर ₹17,500-19,500 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। इसी तरह 334 किस्म ₹2,000-3,000 की तेजी के साथ ₹18,000-20,000 प्रति क्विंटल पर पहुंची। सुरपटेन में ₹3,000-3,500 की तेजी आकर भाव ₹19,000-21,000 प्रति क्विंटल हो गए, जबकि 341 किस्म ₹2,000-5,000 उछलकर ₹20,000-25,000 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। ब्याडगी और इंडो-5 किस्मों में भी ₹2,000-3,500 की तेजी दर्ज की गई और इनके भाव ₹18,500-21,000 प्रति क्विंटल हो गए। फटकी लालमिर्च भी ₹1,000-3,000 की तेजी के साथ ₹10,000-13,000 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। तेलंगाना की वारंगल मंडी में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। यहां देवनुरी और तेजा लालमिर्च के भाव ₹2,000-3,000 बढ़कर क्रमशः ₹17,000-19,500 और ₹17,500-20,000 प्रति क्विंटल हो गए। 341 किस्म ₹2,000-5,000 उछलकर ₹20,000-25,200 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। गुणवत्ता में करीब 30 प्रतिशत कमजोर फटकी लालमिर्च भी ₹1,000-3,000 की तेजी के साथ ₹10,000-13,000 प्रति क्विंटल पर कारोबार करती रही। अचानक आई इस तेजी का मुख्य कारण यह है कि भले ही नई फसल की आवक बढ़ रही है, लेकिन पिछले तीन दिनों से कोल्ड स्टोरेज के माल की बिक्री लगभग ठप है, जिससे बाजार की धारणा में एकाएक बदलाव आया है। स्टॉकिस्टों और बाहर के व्यापारियों को अब लगने लगा है कि नई फसल के उत्पादन में पहले जताई जा रही कमी से भी ज्यादा गिरावट आ सकती है, जिसके चलते मंडियों में आवक में अभी से सख्ती के संकेत दिखने लगे हैं। उन्होंने आगे बताया कि इससे पहले आए मोंटा चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में खेतों में खड़ी लालमिर्च की फसल को भारी नुकसान हुआ था। नई फसल के उत्पादन के शुरुआती अनुमान पहले ही कम बताए जा रहे हैं और वास्तविक उत्पादन इससे भी कम रहने की आशंका है। मसाला बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों (अप्रैल-अक्टूबर 2025) में लालमिर्च का निर्यात साल-दर-साल 31 प्रतिशत बढ़कर 4,32,436 क्विंटल हो गया, जबकि इससे होने वाली आय 9 प्रतिशत बढ़कर ₹5,886.04 करोड़ पहुंच गई। व्यापारिक सूत्रों का मानना है कि मौजूदा आसमान छूती कीमतों के कारण थोक और खुदरा मांग पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में मुनाफावसूली की बिकवाली भी देखने को मिल सकती है, इसलिए व्यापारियों को लालमिर्च में कारोबार सोच-समझकर करने की सलाह दी जा रही है।

Insert title here