दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान सागर में समय से पहले दस्तक दी
दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष सामान्य समय से पहले अंडमान सागर में प्रवेश कर गया है। 16 मई 2026 को यह दक्षिण अंडमान सागर और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह तक पहुँच चुका है, जो सामान्य तारीख से लगभग एक सप्ताह पहले है। इसके बाद मानसून बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों तथा उत्तर अंडमान सागर में भी फैल रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अंडमान सागर में मानसून का जल्दी आगमन सीधे केरल में प्रवेश या पूरे देश में मानसून के प्रदर्शन से जुड़ा नहीं है। केरल में मानसून आमतौर पर 1 जून के आसपास पहुँचता है, जिसमें सात दिन का उतार-चढ़ाव संभव है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 10 मई से पहले मानसून के आगमन का आकलन नहीं किया जाता। 14 प्रमुख मौसम केंद्रों में कम से कम 60% केंद्र लगातार दो दिन तक 2.5 मिमी या उससे अधिक वर्षा दर्ज करें, तभी केरल में मानसून की घोषणा की जाती है। केरल में मानसून के आगमन के लिए कुछ अन्य मौसमीय शर्तें भी आवश्यक हैं। इनमें भूमध्य रेखा से 10�N तक, 55�E से 80�E के बीच लगभग 12,000 फीट की ऊँचाई तक पच्छिमी हवाएँ सक्रिय होना, 5�N से 10�N और 70�E से 80�E क्षेत्र में 3,000 फीट ऊँचाई पर हवाओं की गति 15-20 नॉट्स होना, और 5�N से 10�N तथा 70�E से 75�E क्षेत्र में आउटगोइंग लॉन्गवेव रेडिएशन (OLR) 200 W/m� से कम होना शामिल है। अरब सागर शाखा की मजबूत हवाएँ केरल में मानसून के आगमन के लिए जिम्मेदार होती हैं, जबकि अंडमान सागर में प्रारंभिक गतिविधियाँ मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी शाखा पर निर्भर करती हैं। बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण मानसून की प्रगति को तेज करते हैं और लक्षद्वीप, केरल तथा तटीय कर्नाटक में बारिश शुरू कराते हैं।